Guru Dosha गुरु दोष

गुरु ज्योतिष
Guru Dosha
14 Nov 2017

Guru Dosha गुरु दोष : अज्ञात निवारक उपाय

इस लेख  गुरु दोष (Guru Dosha)  का तात्पर्य और उद्देस्य दोनों ही समकालिक एवं दीर्घकालिक रूप से एक अत्यंत ही महत्त्वपूर्ण तथ्य की व्याख्या एवं सभी के हित के लिए है जिसमे जो ज्योतिष के जानकार वो भी और वो भी जो ज्यादा कुछ इस क्षेत्र में रूचि नहीं रखते है। आज का ज्योतिष का क्षेत्र या यूँ कहें कोई भी क्षेत्र उसमे हर तरह के श्रेणी के लोग उपलब्ध हैं जिनमे वो लोग भी हैं जो श्रेष्ठ जानकार हैं एवं वो भी जो अल्प या सतह की जानकारी रखते हैं पर उन्होंने उस विद्या को या क्षेत्र को जीवन यापन का साधन बना रखा है। वो कितना सही है या गलत है वह हमारा विषय नहीं है मंथन का लेकिन आजकल के वातावरण को देखते हुए एक बात सब के साथ साझा कराना चाहूंगा ।

यद्यपि प्रति व्यक्ति का जीवन का उद्देस्य एवं संस्कार अलग अलग होते हैं और कोई भी दो व्यक्ति एक जैसा न तो सोचता है और नाही ही उनके कर्म होते हैं इसी प्रकार से जब हम किसी ज्योतिषाचार्य या ऐसे ही किसी विषय के जानकार व्यक्ति से संपर्क करते हैं और उनकी सलाह लेते हैं उनके बताये रास्ते , मंत्र , उपाय, दिशानिर्देश का पालन करते हैं तो संभव हो सकता है की लाभ हो या ना हो और दिशा या मार्गदर्शन  दिखाने वाले व्यक्ति का क्या उद्देस्य,धारणा एवं भावना क्या है वह केवल उसके ह्रदय में ही समाहित होता है,जैसे की वह जनता की सेवा एवं उनकी मदद अपने ज्ञान से करना चाहता है या अपने आर्थिक लाभ और लोभ को पूरा करना चाहता  परन्तु एक बात तो बिलकुल स्पष्ट है की प्रति एक व्यक्ति गलत नहीं हो सकता और लोभी धूर्त नहीं होता ,आज के महत्वकांशी एवं स्पर्धात्मक वातावरण में अच्छे व्यक्तियों की संख्या वास्तव में कम होती जा रही है अपितु अभी भी ज्ञान,संस्कार एवं मानवता की ही जयकार  है ।

ज्योतिषीय अलंकरण में गुरु, शिक्षक ,मार्गदर्शक,पुत्र, जीव,ज्ञान, वृद्धि,बुद्धि इत्यादि सब बृहस्पति ग्रह के आधीन हैं । इनमे से किसी एक की कमी जीवन को अपूर्ण एवं पशु तुल्य बनाते हैं और जीवन अति ही कष्टदायी हो जाता है । सभी पाठकों को एक बात का ज्ञान तो अवश्य होगा की जितने भी चीज़ें , रिश्तें , व्यव्हार, एवं जिनके बारे में हम सोच सकते हैं वो सब किसी न किसी ग्रह के अधीन होते हैं और ग्रह उनके सूचक , कारक होते हैं अतः उनके द्वारा उस ग्रह का और उस वस्तु, रिश्तों आदि से  ग्रह कि अवस्था कि आसानी से पता लगाया जा सकता है ।

अब इस प्रस्तावना के बाद हम लेख के केंद्र की ओर बढ़ते हैं ,सभी ने प्रायः ही सुना, देखा होगा की अक्सर लोग किसी ज्योतिष , गुरु, या गुरु तुल्य मार्गदर्शक से संतुष्ट न होने अथवा किसी स्वार्थवस् ,कारणवश उनको अपशब्द, गाली , बुरा बर्ताव ,बुरा भला कहते हैं अथवा कोसते हैं ,उनके बारे में गलत लिखते हैं , अब यहाँ पे ध्यान देने वाली बात है की जब लोग ऐसा कुकृत्य करते हैं तो वो सीधे सीधे अपने गुरु ग्रह को खराब करते हैं और गुरु दोष (Guru Dosha) को जन्म देते हैं जाने अनजाने में और अपने जीवन में अनेको अनेको कष्टों को आमंत्रण देते हैं जोकि इस जन्म में नहीं अथवा अनेकों जन्मों तक उनका साथ नहीं छोड़ता।

एक बात यहाँ हम स्पष्ट करना चाहेंगे की यहाँ केवल हम उन गुरुओं, मार्गदर्शोकों   का संज्ञान ले रहे हैं  जो वास्तव में गुरु , शिक्षक , ज्योतिष, पथप्रदर्शक आदि हैं जिनके अचार व्यवहार एवं क्रिया कलाप दोष रहित एवं सम्मानजनक हैं नाकि उनके रूप में उपलब्ध कोई बहरूपिया या कोई स्वार्थी छल कपटी की बात नहीं कर रहे हैं जैसा की आजकल हमें प्रायः ही ख़बरों में सुनने को मिलता हैं।

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ये बात भी सबको पता होना चाहिए की इस सृष्टि में सबसे बड़ा जो दोष है वो गुरुदोष ही है जिसके समर्थन में अनेको कथाएं एवं लोकोक्तियाँ उपलब्ध हैं हमारे इतिहास, शारत्रों में और ये कबीरदास जी के दोहे  जो अपने आप में कुछ बताने के लिए नहीं छोड़ते :

गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय।

बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।।

गुरू बिन ज्ञान न उपजै, गुरू बिन मिलै न मोष।

गुरू बिन लखै न सत्य को गुरू बिन मिटै न दोष।।

 अतः ये तो सर्वज्ञात है की चाहे जितने भी श्रेष्ठ कर्म कर लीजिये मगर बिना गुरु के मुक्ति नहीं है किसी भी प्राणी की इस धरती पे इसलिए गुरु या उनके तुल्य व्यक्ति के प्रति किया अपराध प्राकृतिक रूप से ही अक्षम्य है।

ज्योतिष में जिन व्यक्तियों की कुंडली में बृहस्पति ६,८,१२ स्थित अथवा अति दूषित हैं राहु केतु  आदि से वे स्वतः ही स्पष्ट करते हैं की व्यक्ति ने पूर्व जन्मों में गुरु सम्बंधित ही कोई अपराध किया था जो की इस जन्म में उस से सम्बंधित कष्टों एवं गुरु सम्बंधित ऊर्जा की कमी को कारण बना है । हमने अपने छोटे इस जीवन में इस प्रकार के अनेक अनुभव हुए जिसमे व्यक्ति मार्गदर्शन प्राप्त करने के उपरांत अनेकों लाभ अभिलाषाओं पूर्ती और जीवन में अनेक महत्वपूर्ण बदलाव होने के बावजूद भितरघात , छल कपट करता है एवं पुनः धीरे धीरे अर्जित किये समस्त सुखों को खोता है कुछ ही वर्षों में वापस वहीँ खड़ा हो जाता है जहाँ से चला था  ।

इस बात को दूसरी तरीके से समझिये जिस समय गुरु या ज्योतिष किसीको मंत्र, तंत्र, यन्त्र देता और व्यक्ति उसका प्रयोग चालू करता है उसी समय ही वह उस व्यक्ति का स्वतः ही गुरु बन जाता है व्यक्ति के बिना संज्ञान के ही क्योंकि जब गुरु आपको मंत्र देता है तो वह आपको अपनी ऊर्जा एवं अपने शुभ कर्मों से कुछ हिस्सा देता है आपके कल्याण हेतु,यहाँ गुरु का आपके लिए किया गया कर्म उसके त्याग को भी दर्शाता है ।

अतः समस्त पाठकों से निवेदन है की इस प्रकार का कोई कृत्या न करे जिससे आपकी, बुद्धि ,पुत्र, ज्ञान ऐश्वर्य आदि की हानि हो केवल आपके अपशब्दों और दुष्कृत्यों द्वारा और जैसा की हमने पहले ही बोला की यह जन्म जन्मांतर तक चलता है सबसे बुरा दोष (Guru Dosha )होने के कारण जो आपको स्वयं और अपने बच्चों के साथ मिलकर भोगना पड़े इसलिए अगर आप कुछ अच्छा नहीं कर सकते गुरु के लिए तो बुरा करने से बचें ।

सर्वश्रेष्ठ माध्यम यह है की गुरु की पहचान एवं उसके गुरुत्व के बारे में पता करें तभी उन तक पहुंचे और अगर आपको चीज़ें या व्यवहार नहीं जमते नहीं उत्तम लगते तो उनसे  बिना किसी दुर्व्यवहार के अपना रास्ता अलग करलें और कोई दुसरे की तलाश करें और इस बात का हमेशा ध्यान रखें। जैसा की हम आज के समय में इंटरनेट के जगत में लोगों को ज्ञान देने वाले या अपने ज्ञान को साझा करने वाले को बुरा भला कहते लिखते देखते हैं जो की निश्चित रूप से निंदनीय है कृपया ऐसा करने से बचे अपने गुरु ग्रह और कर्मों को न  ख़राब करें । किसी भी प्रकार से भी दिया गया हो ज्ञान अथवा मार्गदर्शन चाहे मुफ्त में हो या धन देकर अच्छा लगे तो सराहे या ग्रहण करें न अच्छा लगे तो शांत रहे और आगे बढ़ें । आपके दुर्व्यवहार से किसी का कुछ बिगड़े न बिगड़े परन्तु आपका नुक्सान तय है जोकि तुरंत नहीं पता चलता अपितु समय के साथ साथ आगे आता है। Guru Dosha Remedies

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नमो नारायण

Jupiter Speaks

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